قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے

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قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے — Page 37

قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے ५० श्रीमद्भगवद्गीता धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥ और अपने धर्मको देखकर भी तूं भय करनेकी योग्य नहीं है; क्योंकि धर्मयुक्त युद्धसे बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारक कर्तव्य क्षत्रियके लिये नहीं है । यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् । सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ३२ और हे पार्थ! अपने आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्गके द्वाररूप इस प्रकारके युद्धको भाग्यवान् क्षत्रियलोग ही पाते हैं ॥ ३२ ॥ अथ चेत्वमिमं धयं संग्रामं न करिष्यसि । ततः स्वधर्म कीर्ति च हित्वा पापमवाप्स्यसि || और यदि तूं इस धर्मयुक्त संग्रामको नहीं करेगा तो स्वधर्मको और कीर्तिको खोकर पापको प्राप्त होगा। अकीर्ति चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययां संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ||३४|| और सब लोग तेरी बहुत कालतक रहनेवाली अपकीर्तिको भी कथन करेंगे और वह अपकीर्ति 37 2