قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے — Page 36
قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے گیتا میں جنگ کے بارے میں تعلیم : जंग की तालीम गीता में अध्याय २ आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन- मार्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति ४९ श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ||२९|| और हे अर्जुन ! यह आत्मतत्त्व बड़ा गहन है, इसलिये कोई महापुरुष ही इस आत्माको आश्चर्यकी ज्यों देखता है और वैसे ही दूसरा कोई महापुरुष ही आश्चर्यकी ज्यों इसके तत्त्वको कहता है और दूसरा कोई ही इस आत्माको आश्चर्यकी ज्यों सुनता है और कोई-कोई सुनकर भी इस आत्माको नहीं जानता । देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत । तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ३० हे अर्जुन ! यह आत्मा सबके शरीर में सदा ही अंत्रव्य है, इसलिये सम्पूर्ण भूतप्राणियोंके लिये तूं शोक करनेको योग्य नहीं है ॥ ३० ॥ स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि । * जिसका वध नहीं किया जा सके। 36