قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے — Page 39
قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے ५२ श्रीमद्भगवद्गीता सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ||३८|| यदि तुझे स्वर्ग तथा राज्यकी इच्छा न हो तो भी सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजयको समान समझकर उसके उपरान्त युद्धके लिये तैयार हो, इस प्रकार युद्ध करनेसे तूं पापको नहीं प्राप्त होगा ||३८|| एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु । बुद्धया युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ।। हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिये ज्ञानयोगके* विषय- में कही गई और इसीको अब निष्काम कर्मयोगके। विषय में सुन कि जिस बुद्धिसे युक्त हुआ तूं कर्मो के बन्धनको अच्छी तरहसे नाश करेगा ।। ३९ ॥ नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते । स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ।। और इस निष्काम कर्मयोग में आरम्भका अर्थात् *+ अध्याय ३ श्लोक ३ की टिप्पणी में इसका विस्तार देखना चाहिये । (श्रीमद्भगवतगीता प्र۔न۔49, 50, 51, 52 प्रकाशक मोतीलाल जालान, गीताप्रेस गोरखपुर, 2027 बिक्रमी, 1970 ई۔) ' 39