قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے

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قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے — Page 38

قرآن مجید کا محافظ اللہ تعالیٰ ہے अध्याय २ माननीय पुरुष के लिये मरणसे भी अधिक बुरी होती है। भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः । येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवन् ॥ और जिनके तूं बहुत माननीय होकर भी अब तुच्छताको प्राप्त होगा, वे महारथीलोग तुझे भयके कारण युद्धसे उपराम हुआ मानेंगे || ३५ ॥ अवाच्यवादांच बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः । निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् || और तेरे बैरीलोग तेरे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए बहुत-से न कहने योग्य वचनोंको कहेंगे, फिर उससे अधिक दुःख क्या होगा १ ।। ३६ ।। हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्ण जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ॥३७॥ इससे युद्ध करना तेरे लिये सब प्रकारसे अच्छा है; क्योंकि या तो मरकर स्वर्गको प्राप्त होगा अथवा जीतकर पृथ्वीको भोगेगा, इससे हे अर्जुन ! युद्धके लिये निश्चयवाला होकर खड़ा हो || ३७ ॥ 38 88